- October 7, 2026
- Posted by: Ek Yojana
- Categories: Latest Govt Schemes, Manipur, State Govt Schemes
मणिपुर हथकरघा बुनकर विकास योजना को राज्य के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र, बुनकरों की आय और रोजगार को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों के रूप में समझा जा सकता है। मणिपुर में हथकरघा बुनाई ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़ी हैं। राज्य सरकार के अनुसार 2019 की राष्ट्रीय हथकरघा जनगणना में मणिपुर में करीब 2.12 लाख हथकरघा बुनकर और 2.11 लाख करघे दर्ज किए गए थे।
योजना का उद्देश्य
इस तरह की हथकरघा विकास पहलों का मुख्य लक्ष्य बुनकरों की उत्पादकता बढ़ाना, पारंपरिक बुनाई को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उनके तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। केंद्र की राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (NHDP) के तहत भी मणिपुर सहित राज्यों में क्लस्टर विकास, मार्केटिंग सहायता, तकनीकी उन्नयन, बुनकरों के कल्याण और रियायती ऋण जैसी गतिविधियों को समर्थन दिया जाता है।
बुनकरों को क्या लाभ मिल सकते हैं?
हथकरघा विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत जरूरत के आधार पर बुनकरों को कई प्रकार की सहायता मिल सकती है, जैसे:
- हथकरघा और सहायक उपकरणों की सुविधा
- बेहतर करघे और तकनीकी उन्नयन
- डिजाइन विकास में सहायता
- उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशिक्षण
- नए उत्पाद और डिजाइन विकसित करने में सहयोग
- प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराना
- कार्यशेड और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास
- बुनकरों को समूह या क्लस्टर के रूप में संगठित करना
- रियायती ऋण और Weaver MUDRA जैसी वित्तीय सहायता
राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम में क्लस्टर विकास के तहत करघे/सहायक उपकरण, लाइटिंग यूनिट, वर्कशेड, डिजाइनर और उत्पाद विकास जैसी सहायता का प्रावधान है।
मणिपुर के बुनकरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
मणिपुर में हथकरघा केवल पारंपरिक कला नहीं बल्कि रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। राज्य सरकार के दस्तावेज के अनुसार अलग-अलग समुदायों की अपनी विशिष्ट मोटिफ, डिजाइन और कपड़े की संरचना है। हथकरघा गतिविधियों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी होने के कारण यह क्षेत्र महिला आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रशिक्षण और कौशल विकास
बुनकरों को नई तकनीक, डिजाइन, बुनाई और अन्य संबंधित कौशल सिखाने के लिए केंद्र की SAMARTH योजना के तहत भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। आधिकारिक पोर्टल पर मणिपुर को SAMARTH के अंतर्गत शामिल राज्यों में सूचीबद्ध किया गया है।
ऋण और वित्तीय सहायता
हथकरघा क्षेत्र से जुड़े पात्र बुनकरों के लिए Concessional Credit/Weaver MUDRA Scheme भी उपलब्ध है। इसका उद्देश्य बुनकरों को कम लागत पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता और व्यवसाय को बढ़ावा देना है। विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय इसके लाभार्थियों और मार्जिन मनी सहायता से संबंधित रिकॉर्ड भी प्रकाशित करता है।
मणिपुर में मुख्यमंत्री यार्न योजना से संबंध
मणिपुर सरकार ने हथकरघा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण जरूरत यार्न यानी बुनाई के कच्चे माल को ध्यान में रखते हुए Chief Minister Yarn Scheme भी लागू की है। राज्य के 2026-27 बजट में इस योजना के लिए ₹10 करोड़ का प्रावधान दर्ज है।
आवेदन कैसे करें?
हथकरघा क्षेत्र से जुड़ी सहायता के लिए आवेदन की प्रक्रिया योजना और सहायता के प्रकार पर निर्भर करती है। बुनकर अपने क्षेत्र के हथकरघा विभाग, संबंधित जिला कार्यालय, बुनकर संगठन/क्लस्टर या संबंधित सरकारी एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं। केंद्र की योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य हथकरघा निदेशालयों और अन्य पात्र एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
जरूरी दस्तावेज
योजना या सहायता के अनुसार सामान्यतः इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है:
- आधार कार्ड
- मणिपुर निवास प्रमाण
- बुनकर पहचान/हथकरघा संबंधित प्रमाण
- बैंक खाते की जानकारी
- मोबाइल नंबर
- पासपोर्ट साइज फोटो
- स्वयं सहायता समूह या सहकारी समिति का विवरण, यदि लागू हो
- आय/श्रेणी से संबंधित दस्तावेज, यदि संबंधित योजना में आवश्यक हों
नोट: अलग-अलग सहायता और योजनाओं की पात्रता, दस्तावेज और आर्थिक सहायता अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग की वर्तमान गाइडलाइन देखना जरूरी है।