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भारत सरकार द्वारा लागू किया गया महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल है। 2 फरवरी 2006 से लागू यह अधिनियम भारत के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है।

पात्रता

  • आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • आवेदक ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।

मनरेगा का उद्देश्य

मनरेगा का मूल लक्ष्य है –

  1. ग्रामीण परिवारों को रोजगार का अधिकार प्रदान करना।

  2. गरीबी घटाना और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना।

  3. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना — जैसे सड़कें, तालाब, जल संरक्षण संरचनाएं, खेत-बंधी आदि।

  4. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।

इस अधिनियम के अंतर्गत हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को मांग पर काम देने की कानूनी गारंटी दी गई है।

मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  1. 100 दिन का रोजगार गारंटी – प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन का रोजगार प्रदान किया जाता है।

  2. मजदूरी का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से – पारदर्शिता और भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए भुगतान सीधे बैंक/डाकघर खातों में किया जाता है।

  3. काम की प्रकृति – जल संरक्षण, भूमि विकास, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़क निर्माण, सिंचाई संरचना आदि जैसे कार्य शामिल हैं।

  4. महिलाओं की भागीदारी – अधिनियम के तहत कम से कम 33% रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित है।

  5. सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) – प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर काम की समीक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक लेखा परीक्षा की व्यवस्था है।

ग्रामीण विकास पर प्रभाव

मनरेगा ने ग्रामीण भारत में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता का आधार मजबूत किया है।

  • लाखों परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, जिससे शहरी पलायन में कमी आई।

  • महिलाओं की भागीदारी ने उन्हें वित्तीय रूप से सशक्त बनाया।

  • ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार से कृषि उत्पादकता और जल संसाधनों के संरक्षण में मदद मिली।

  • महामारी के दौरान मनरेगा ने जीविका सुरक्षा कवच की तरह काम किया, जिससे लाखों प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मिला।

पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी का उपयोग

मनरेगा के कार्यान्वयन में तकनीकी सुधारों का भी बड़ा योगदान है –

  • जॉब कार्ड और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम से फर्जीवाड़ा कम हुआ।

  • NMMS (National Mobile Monitoring Software) ऐप से कार्यस्थलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है।

  • ऑनलाइन MIS पोर्टल से पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं।

चुनौतियाँ और सुधार की दिशा

हालाँकि मनरेगा ने व्यापक सफलता हासिल की है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं –

  • कई राज्यों में मजदूरी भुगतान में देरी की समस्या।

  • कौशल आधारित कार्यों की कमी, जिससे रोजगार सीमित स्वरूप में रह जाता है।

  • स्थानीय स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता।

    फ़ायदे

    • आवेदक को आवेदन की तारीख से 15 दिनों के भीतर गारंटीकृत रोजगार प्राप्त होता है।
    • आवेदक को उसके निवास के 5 किलोमीटर के दायरे में या ब्लॉक के अंतर्गत काम उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है। यदि आवेदक कार्यस्थल से 5 किमी से अधिक दूर रहता है, तो वह यात्रा और निर्वाह भत्ते (न्यूनतम वेतन का 10%) का हकदार होगा।
    • पारिश्रमिक का भुगतान एक सप्ताह के भीतर या अधिकतम पंद्रह दिनों के भीतर किया जाता है। पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से भुगतान किया जाता है।
    • प्रत्येक कार्यस्थल पर छाँव, पेयजल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाती है।

 

सरकार अब योजना में ग्रीन वर्क्स, डिजिटलीकरण, और जलवायु अनुकूल परियोजनाओं को शामिल करने की दिशा में कार्य कर रही है ताकि इसका दायरा और प्रभाव बढ़ाया जा सके।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह समानता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण सशक्तिकरण का प्रतीक है।
यह योजना भारत के ग्रामीण समाज को न केवल आर्थिक स्थिरता देती है बल्कि सम्मानजनक श्रम और सामाजिक सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करती है।



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