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भारत सरकार ने देश के शिल्पकारों और कारीगरों के कल्याण के लिए पेंशन एवं चिकित्सा सहायता योजना शुरू की है। यह योजना विशेष रूप से उन कारीगरों को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई है, जो पारंपरिक शिल्प और हस्तकला के क्षेत्र में कार्यरत हैं और अक्सर अनियमित आय पर निर्भर रहते हैं।

अपने विशिष्ट क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले किन्तु वृद्धावस्था के कारण दयनीय जीवन व्यतीत करने वाले या अभावग्रस्तता की स्थिति वाले पुराने कलाकारों एवं अध्येताओं की वित्तीय एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए एम.ओ.सी द्वारा एक पेंशन योजना।
इस योजना में इन कलाकारों एवं उनके पति/पत्नी को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता वाले रोगों के लिए, स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के एक चिन्हित नेटवर्क के माध्यम से उपचार के लिए, सरकार की एक सुविधाजनक एवं किफायती स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत कवर करते हुए चिकित्सा सहायता सुविधा प्रदान करने पर विचार किया गया है।

फ़ायदे

राष्ट्रीय कलाकार पेंशन कोष –
  1. ऐसे मामलों में राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह न्यूनतम रू.500/- मासिक भत्ता दिया जाएगा।
  2. ऐसे मामलों में केंद्र सरकार द्वारा अधिकतम ₹3500/- प्रति माह प्रति लाभार्थी मासिक भत्ते का योगदान किया जाएगा।
  3. अतएव प्रति माह प्रति लाभार्थी अधिकतम कुल भत्ता ₹4000/-होगा।
राष्ट्रीय कलाकार चिकित्सा सहायता कोष –
  1. वर्तमान लाभार्थियों एवं उनके पति/पत्नी को वितरित की जाने वाली मासिक पेंशन राशि के अतिरिक्त उनके स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्राप्त करने पर होने वाले व्यय को केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

पात्रता

  • आवेदक एक कलाकार होना चाहिए।
  • आवेदक की आयु 60 (साठ) वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए (यह पति-पत्नी के मामले में लागू नहीं होता है)।
  • आवेदक एवं उसके जीवनसाथी की कुल वार्षिक आय ₹ 48,000 प्रति वर्ष से या इससे कम होनी चाहिए।
  • आवेदक को विपन्न /दयनीय/अभावग्रस्त परिस्थितियों में जीवनयापन करता होना चाहिए।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारतीय शिल्प और हस्तकला उद्योग को मजबूती देती है। कारीगरों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से वे अपने हुनर को भविष्य की पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, यह पहल ग्रामीण और शहरी शिल्पकला केंद्रों में रोजगार और स्थायित्व बढ़ाने में भी मदद करती है।

पंजीकरण प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है, और पात्र कारीगर ऑनलाइन या स्थानीय हस्तकला कार्यालयों के माध्यम से योजना का लाभ ले सकते हैं। यह कदम न केवल शिल्पकारों के जीवन को सुरक्षित बनाता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और कला को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



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