- September 12, 2025
- Posted by: Ek Yojana
- Category: Central Govt Schemes
यह एक ऐसी योजना है, जो रेहड़ी-पटरी पर माल बेचने वाले विक्रेताओं के लिए कार्यशील पूंजी पर लोन देने, नियमित पुनर्भुगतान को प्रोत्साहित करने और डिजिटल लेनदेन को पुरस्कृत करने के लिए है। इस योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों को औपचारिक रूप देना और इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए नए अवसर प्रदान करना है।
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना की शुरुआत जून 2020 में हुई थी। इसका उद्देश्य देशभर के रेहड़ी-पटरी वालों, फेरीवालों और छोटे व्यापारियों को सस्ती दरों पर कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना व्यवसाय दोबारा शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
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ब्याज सब्सिडी
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लाभार्थियों को समय पर ऋण चुकाने पर 7% ब्याज सब्सिडी दी जाती है।
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यह सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा की जाती है।
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ऋण की राशि
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पहले चरण में ₹10,000 तक का ऋण।
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समय पर पुनर्भुगतान करने पर अगली किश्त ₹20,000 और फिर ₹50,000 तक उपलब्ध।
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डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन
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लाभार्थी अगर डिजिटल लेनदेन करते हैं, तो उन्हें कैशबैक इनाम मिलता है।
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कोई गारंटी नहीं
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ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जाता है।
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इससे छोटे व्यापारियों को बिना जोखिम के अवसर मिलता है।
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कवर किए गए लाभार्थी
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फल-सब्जी विक्रेता
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रेहड़ी-पटरी वाले
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चाय, पान, और अन्य छोटे ठेले वाले
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शहरी सड़क किनारे दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारी
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उद्देश्य
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स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति में सुधार करना।
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कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से प्रभावित हुए व्यापार को फिर से पटरी पर लाना।
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छोटे व्यापारियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना।
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आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाना।
योजना का लाभ
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अब तक लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को इस योजना से लाभ मिला है।
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इससे उनका व्यापार फिर से खड़ा हुआ और उन्हें आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता मिली।
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योजना ने रेहड़ी-पटरी वालों की सामाजिक पहचान और सम्मान भी बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए जीवन बदलने वाली पहल है। यह न केवल उन्हें आसान ऋण उपलब्ध कराती है, बल्कि उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल लेनदेन और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाती है।
पात्रता
- वे रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, जिनके पास शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) द्वारा जारी किए गए विक्रय प्रमाणपत्र / पहचान पत्र हैं।
- ऐसे विक्रेता, जिनकी सर्वेक्षण में पहचान की गई है, लेकिन उन्हें विक्रय का प्रमाणपत्र/पहचान पत्र जारी नहीं किया गया है; ऐसे विक्रेताओं के लिए एक आई.टी. आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से अस्थायी विक्रय प्रमाणपत्र तैयार किया जाएगा। यूएलबी को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे ऐसे विक्रेताओं को एक महीने की अवधि के भीतर तत्काल और सकारात्मक रूप से विक्रय और पहचान पत्र का स्थायी प्रमाण पत्र जारी करें।
- ऐसे रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, जो यू.एल.बी. पहचान सर्वेक्षण से छूट गए हैं या जिन्होंने सर्वेक्षण पूरा होने के बाद माल बेचना शुरू किया है और जिन्हें यू.एल.बी / टाउन वेंडिंग कमेटी (टी.वी.सी) द्वारा उस आशय का अनुशंसा पत्र (एल.ओ.आर.) जारी किया गया है; तथा
- यू.एल.बी की भौगोलिक सीमा में आसपास के विकास / अर्ध शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों के विक्रेता और जिन्हें यू.एल.बी / टी.वी.सी. द्वारा इस आशय का अनुशंसा पत्र (एल.ओ.आर.) जारी किया गया है।
आवेदन प्रक्रिया