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सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ सरकार का एक जनसंवाद और जनसमस्या निवारण अभियान है, जिसका उद्देश्य शासन को आम नागरिकों के करीब लाना और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है। वर्ष 2026 में सरकार ने इसे और व्यापक स्तर पर आयोजित किया।

सुशासन तिहार का उद्देश्य

इस अभियान के जरिए नागरिक अपनी शिकायत, मांग और लंबित सरकारी कामकाज से जुड़ी समस्याएं प्रशासन के सामने सीधे रख सकते हैं। अभियान में अधिकारियों को आवेदनों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए हैं।

किन समस्याओं का समाधान होगा?

सुशासन तिहार में प्रमुख रूप से इन मामलों को प्राथमिकता दी गई है:

  • भूमि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन
  • मनरेगा मजदूरी के लंबित भुगतान
  • आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र
  • बिजली और ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याएं
  • हैंडपंप एवं पेयजल संबंधी शिकायतें
  • राशन कार्ड से जुड़ी समस्याएं
  • आयुष्मान भारत योजना का लाभ
  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन
  • उज्ज्वला योजना से संबंधित मामले
  • विभिन्न सरकारी योजनाओं के लंबित प्रकरण

सुशासन तिहार 2026 में कब हुआ?

राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए गए। अलग-अलग जिलों में गांवों और नगरीय क्षेत्रों के क्लस्टर बनाकर शिविर लगाए गए।

आवेदन कैसे करें?

नागरिक अपने क्षेत्र में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन में समस्या का स्पष्ट विवरण और संबंधित दस्तावेज लगाए जा सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा प्राप्त आवेदनों पर कार्रवाई की जाती है।

कुछ जिलों में प्रशासन ने शिविर में प्राप्त आवेदनों का मौके पर निराकरण करने की व्यवस्था भी की थी, जबकि कुछ मामलों के लिए अधिकतम एक माह में समाधान का लक्ष्य रखा गया।

सुशासन तिहार से क्या फायदा?

इस अभियान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि नागरिकों को अपनी समस्या के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होती है। अधिकारी और विभागीय कर्मचारी शिविरों में मौजूद रहकर शिकायतों और मांगों पर कार्रवाई करते हैं। साथ ही पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया जाता है।

सुशासन तिहार 2026 के दौरान जनसमस्या समाधान के साथ मेगा क्रेडिट कैंप भी आयोजित किए गए। मोहला जिले में 1 से 28 मई के बीच विभिन्न बैंकों ने करीब 48.99 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता समूह, मुद्रा और अन्य ऋण शामिल थे।



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