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छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को गोबर के बदले आय उपलब्ध कराने की पहल के रूप में शुरू की गई थी। योजना के तहत गौठानों में पशुपालकों और गोबर संग्राहकों से गोबर खरीदा जाता था। सरकार ने इसकी खरीद दर 2 रुपये प्रति किलो निर्धारित की थी।

योजना का उद्देश्य

गोधन न्याय योजना का उद्देश्य पशुधन संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आय बढ़ाना और गोबर का उपयोग जैविक खाद जैसे उत्पाद बनाने में करना था। गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट तैयार करने की गतिविधियां भी संचालित की गईं।

योजना के प्रमुख लाभ

  • गोबर बेचकर पशुपालकों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर।
  • गोबर की खरीद 2 रुपये प्रति किलो की दर से।
  • गोबर से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन।
  • महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार और आय के अवसर।
  • गांवों में पशुपालन को प्रोत्साहन।
  • जैविक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा।
  • गौठानों को ग्रामीण रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने का प्रयास।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, योजना से लगभग 2 लाख हितग्राही लाभान्वित हो रहे थे और ग्रामीण महिलाओं तथा भूमिहीन मजदूरों को भी आजीविका के अवसर मिले थे।

कौन ले सकता था लाभ?

योजना में मुख्य रूप से पशुपालक, किसान और गोबर विक्रेता शामिल थे। गोबर की खरीदी संबंधित गौठान व्यवस्था के माध्यम से की जाती थी। योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय स्तर पर निर्धारित पंजीयन और प्रक्रिया का पालन करना होता था।

आवेदन/पंजीयन कैसे होता था?

गोधन न्याय योजना की व्यवस्था गांव के गौठान से जुड़ी थी। इच्छुक पशुपालक या गोबर विक्रेता अपने क्षेत्र के संबंधित गौठान, गौठान समिति या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करके पंजीयन और गोबर बिक्री की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते थे।

योजना से महिलाओं को भी मिला रोजगार

गोधन न्याय योजना में स्व-सहायता समूहों को गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट और अन्य गतिविधियों से जोड़ने का प्रावधान किया गया था। सरकारी रिपोर्ट में बताया गया था कि हजारों ग्रामीण महिलाएं इन गतिविधियों के जरिए आजीविका से जुड़ी थीं।

जरूरी बात

गोधन न्याय योजना मुख्य रूप से 2020 में शुरू की गई छत्तीसगढ़ की पिछली राज्य सरकार की प्रमुख योजना थी। इसलिए 2026 में इसके तहत वर्तमान में नए पंजीयन, भुगतान या संचालन की स्थिति को पुराने योजना विवरण से अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध वर्तमान सरकारी पोर्टल पर इस योजना की सक्रियता/नए आवेदन की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। इसलिए लाभ के लिए स्थानीय कृषि/पशुपालन विभाग या संबंधित गौठान से वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना उचित रहेगा।



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