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मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना, जिसे अब इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के नाम से भी जाना जाता है, हिमाचल प्रदेश सरकार की सामाजिक कल्याण योजना है। इसे सितंबर 2024 में अधिसूचित किया गया था। योजना का उद्देश्य विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

इस योजना के जरिए सरकार ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद करती है, जहां आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। योजना में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उच्च और व्यावसायिक शिक्षा को भी सहायता देने का प्रावधान है।

कितनी मिलती है आर्थिक सहायता?

योजना के मूल प्रावधानों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के पात्र बच्चों को ₹1,000 प्रति माह शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी खर्चों के लिए दिए जाते हैं।

उच्च शिक्षा के लिए योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। 18 से 27 वर्ष तक के पात्र विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में डिग्री, डिप्लोमा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए सहायता दी जाती है। फरवरी 2026 में हिमाचल सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाकर पात्र विधवाओं की बेटियों को राज्य के बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में प्रोफेशनल कोर्स करने पर भी सहायता देने को मंजूरी दी।

PG या किराये के आवास के लिए सहायता

यदि किसी पात्र विद्यार्थी को सरकारी हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है और वह राज्य के बाहर सरकारी संस्थान में निर्धारित प्रोफेशनल कोर्स कर रहा है, तो ₹3,000 प्रति माह, अधिकतम 10 महीने तक किराये या PG आवास के खर्च के लिए सहायता का प्रावधान किया गया है।

कौन ले सकता है लाभ?

योजना के तहत मुख्य रूप से:

  • हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी परिवार
  • विधवा महिलाओं के बच्चे
  • तलाकशुदा महिलाओं के बच्चे
  • निराश्रित महिलाओं के बच्चे
  • दिव्यांग अभिभावकों के बच्चे
  • निर्धारित आय सीमा और अन्य सरकारी शर्तों को पूरा करने वाले परिवार

पात्रता के उपलब्ध विवरण में वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से कम होने का उल्लेख है। आवेदन से पहले वर्तमान विभागीय नियमों के अनुसार पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।

योजना के प्रमुख लाभ

मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना में पात्र बच्चों को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सहायता मिलती है। उच्च शिक्षा में ट्यूशन फीस, हॉस्टल तथा अन्य निर्धारित शैक्षणिक खर्चों को भी योजना के प्रावधानों के अनुसार कवर किया जाता है। 2026 में सरकार ने प्रोफेशनल कोर्स करने वाली पात्र बेटियों के लिए राज्य के बाहर भी सहायता का विस्तार किया है।

2026 में योजना का विस्तार

फरवरी 2026 में हिमाचल सरकार ने बताया कि 18 से 27 वर्ष की आयु वर्ग की 504 लड़कियां पहले से योजना का लाभ ले रही थीं। सरकार ने प्रोफेशनल कोर्सों के लिए योजना का दायरा बढ़ाने के साथ लगभग ₹1 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक बजट रखने की बात कही। वित्त वर्ष 2026 में योजना के लिए ₹31.01 करोड़ का प्रावधान बताया गया था।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय सामान्य तौर पर ये दस्तावेज आवश्यक हो सकते हैं:

  • आधार कार्ड
  • हिमाचल प्रदेश का निवास प्रमाण
  • परिवार का आय प्रमाण पत्र
  • माता-पिता/अभिभावक की स्थिति से संबंधित प्रमाण
  • बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र
  • स्कूल या कॉलेज का प्रमाण
  • बैंक खाते की जानकारी
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर

नोट: दस्तावेजों की अंतिम सूची और आवेदन का तरीका संबंधित विभाग के वर्तमान निर्देशों के अनुसार जांचना चाहिए।

योजना का महत्व

सुख शिक्षा योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा को जारी रखना और उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। सरकार ने 2026 में उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्सों तक योजना का विस्तार करके इसका दायरा और बढ़ाया है।



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