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लाडली बेटी योजना जम्मू-कश्मीर सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग की योजना है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों को वित्तीय सुरक्षा देना और उनके भविष्य के लिए बचत सुनिश्चित करना है। योजना के तहत सरकार की ओर से निर्धारित अवधि तक राशि जमा की जाती है और बाद में यह राशि लंबी अवधि की जमा योजना में चली जाती है।

योजना का उद्देश्य

लाडली बेटी योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना, उनके भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना और कमजोर आय वाले परिवारों पर वित्तीय बोझ कम करना है।

कौन ले सकता है लाभ?

जम्मू-कश्मीर सरकार के उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार:

  • 1 अप्रैल 2015 या उसके बाद जन्मी बेटियां योजना के लिए पात्र हो सकती हैं।
  • माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय ₹75,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • योजना जम्मू-कश्मीर के सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा संचालित है।

योजना में कितनी राशि जमा होती है?

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लाभार्थी बच्ची के नाम पर 14 वर्षों तक हर महीने ₹1,000 की सरकारी किस्त जमा की जाती है। इसके बाद खाता दूसरे चरण में चला जाता है, जिसमें राशि को 7 वर्षों के लिए संचयी सावधि जमा (CCR) के रूप में रखा जाता है।

इस तरह योजना की संरचना 14 वर्ष की RD + 7 वर्ष की जमा अवधि पर आधारित है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आधिकारिक योजना विवरण में प्रमुख दस्तावेजों के रूप में ये दस्तावेज बताए गए हैं:

  • आधार कार्ड
  • माता-पिता/अभिभावक का आय प्रमाण पत्र
  • बच्ची का जन्म प्रमाण/जन्मतिथि संबंधी दस्तावेज
  • MCP कार्ड
  • पिता का डोमिसाइल प्रमाण पत्र
  • पहचान एवं बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, जहां आवश्यक हों।

आवेदन कैसे करें?

लाडली बेटी योजना के लिए आवेदन Jansugam पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या कियोस्क के जरिए किया जा सकता है। सरकारी सेवा विवरण के अनुसार आवेदन सामाजिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आता है और सेवा के लिए निर्धारित समय 30 दिन है, सरकारी अवकाश को छोड़कर।

आवेदन प्रक्रिया में संबंधित अधिकारी दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन करते हैं। आधिकारिक योजना विवरण के अनुसार आवेदन प्रक्रिया में तहसीलदार, जिला समाज कल्याण अधिकारी और उपायुक्त स्तर पर सत्यापन/अनुमोदन शामिल है।

योजना का महत्व

लाडली बेटी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्ची के नाम पर लंबे समय तक सरकारी राशि जमा होती रहती है। इससे उसके भविष्य के लिए एक वित्तीय कोष तैयार होता है। 2025 के सरकारी स्वीकृति पत्रों में भी 14 साल की RD और उसके बाद 7 साल की cumulative deposit व्यवस्था का उल्लेख मिलता है।



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