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प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) भारत सरकार की एक प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना है, जिसे कोविड-19 महामारी के बाद शुरू किया गया था ताकि देश के रेहड़ी-पटरी, ठेला, और सड़क किनारे छोटे विक्रेताओं (Street Vendors) को आर्थिक सहायता और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल सके।
इस योजना का उद्देश्य है — इन छोटे कारोबारियों को सस्ते ब्याज दर पर ऋण (Loan) प्रदान कर उन्हें दोबारा अपने काम पर खड़ा करना और डिजिटल भुगतान एवं औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना।

पात्रता

यह योजना 24 मार्च 2020 तक या उससे पहले शहरी क्षेत्रों में बिक्री का काम करने वाले सभी रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं के लिए उपलब्ध है। पात्र विक्रेताओं की पहचान निम्नलिखित मानदंडों के अनुसार की जाएगी:
  • वे रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, जिनके पास शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) द्वारा जारी किए गए विक्रय प्रमाणपत्र / पहचान पत्र हैं।
  • ऐसे विक्रेता, जिनकी सर्वेक्षण में पहचान की गई है, लेकिन उन्हें विक्रय का प्रमाणपत्र/पहचान पत्र जारी नहीं किया गया है; ऐसे विक्रेताओं के लिए एक आई.टी. आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से अस्थायी विक्रय प्रमाणपत्र तैयार किया जाएगा। यूएलबी को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे ऐसे विक्रेताओं को एक महीने की अवधि के भीतर तत्काल और सकारात्मक रूप से विक्रय और पहचान पत्र का स्थायी प्रमाण पत्र जारी करें।
  • ऐसे रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, जो यू.एल.बी. पहचान सर्वेक्षण से छूट गए हैं या जिन्होंने सर्वेक्षण पूरा होने के बाद माल बेचना शुरू किया है और जिन्हें यू.एल.बी / टाउन वेंडिंग कमेटी (टी.वी.सी) द्वारा उस आशय का अनुशंसा पत्र (एल.ओ.आर.) जारी किया गया है; तथा
  • यू.एल.बी की भौगोलिक सीमा में आसपास के विकास / अर्ध शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों के विक्रेता और जिन्हें यू.एल.बी / टी.वी.सी. द्वारा इस आशय का अनुशंसा पत्र (एल.ओ.आर.) जारी किया गया है।

योजना की शुरुआत और उद्देश्य

यह योजना 1 जून 2020 को आरंभ की गई थी, जब लाखों स्ट्रीट वेंडर्स महामारी और लॉकडाउन के कारण अपनी आय के साधन खो बैठे थे।
योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. छोटे विक्रेताओं को कार्यशील पूंजी ऋण (Working Capital Loan) उपलब्ध कराना।

  2. उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली (Formal Financial System) में शामिल करना।

  3. डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करना और प्रोत्साहन राशि (कैशबैक) के माध्यम से उन्हें डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ाना।

  4. धीरे-धीरे उन्हें स्वरोजगार और व्यवसाय विस्तार के लिए सक्षम बनाना।

मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  1. ₹10,000 का प्रारंभिक ऋण – पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के अधिकतम ₹10,000 तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसे 1 वर्ष के भीतर चुकाना होता है।

  2. समय पर भुगतान पर लाभ – ऋण समय पर चुकाने वालों को अगली बार ₹20,000 और फिर ₹50,000 तक का ऋण बढ़ाने का लाभ मिलता है।

  3. ब्याज सब्सिडी – लाभार्थी को 7% वार्षिक ब्याज सब्सिडी सरकार की ओर से सीधे बैंक खाते में दी जाती है।

  4. डिजिटल प्रोत्साहन (Cashback Rewards) – जो वेंडर्स डिजिटल भुगतान (जैसे UPI, QR Code) का उपयोग करते हैं, उन्हें हर महीने ₹50 से ₹100 तक का कैशबैक प्रोत्साहन दिया जाता है।

  5. सरल आवेदन प्रक्रिया – लाभार्थी सीधे Udyamimitra Portal या निकटतम CSC केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

लाभार्थी कौन हैं?

यह योजना देश के सभी शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उन छोटे विक्रेताओं, ठेलेवालों, फेरीवालों, और पटरी दुकानदारों के लिए है जो सड़क किनारे फल-सब्जी, कपड़े, चाय, भोजन, खिलौने, या अन्य वस्तुएं बेचते हैं।
ऐसे विक्रेता जो लॉकडाउन से पहले कारोबार कर रहे थे लेकिन अब बंद हो गए, वे भी पात्र हैं।

योजना का प्रभाव (Impact of PM SVANidhi)

  • अब तक लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को इस योजना से लाभ मिला है।

  • उन्होंने न केवल अपना काम दोबारा शुरू किया बल्कि डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग से भी जुड़ गए।

  • कई वेंडर्स ने अपने व्यवसाय को बढ़ाकर स्थायी दुकानों में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

  • योजना ने आर्थिक पुनर्वास और आत्मनिर्भर भारत के विजन को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है।

डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव

PM SVANidhi ने छोटे कारोबारियों को डिजिटल इंडिया अभियान से जोड़ा है।
अब हजारों स्ट्रीट वेंडर्स UPI आधारित लेन-देन कर रहे हैं, जिससे उनकी क्रेडिट हिस्ट्री बन रही है और भविष्य में उन्हें बड़े ऋण आसानी से मिल सकेंगे।
यह योजना न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है, जिससे स्ट्रीट वेंडर्स समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना ने छोटे व्यवसायियों को न केवल आर्थिक संबल दिया है बल्कि उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और भविष्य की सुरक्षा भी दी है।
यह योजना ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल सिद्धांत पर आधारित है, जो भारत के सूक्ष्म उद्यमियों को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बना रही है।



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